॥ प्रस्तावना ॥
॥ परिचय ॥
खण्ड-१ ॥ मुक्तक ॥
॥ मुक्तक ॥
खण्ड-२ ॥ बालकाव्य ॥
॥ रात्रि ॥
॥ कविता वन ॥
॥ मातृभूमि ॥
॥ कविता--सार ॥
खण्ड-३ ॥ काव्य ॥
॥ हार ॥
॥ यूँही जा रहा हूँ मैं ॥
॥ जुदाई ॥
॥ यादों को ज़हन में बसाए बैठे हैं ॥
॥ मत कर भरोसा मुझ पर ॥
॥ आखिरी पल ॥
॥ शब्द नहीं मिलते ॥
॥ रोने की वज़ह ॥
॥ हताश ॥
॥ भगवान को एक पत्र ॥
॥ बेरंगी दुनिया ॥
॥ गुज़री यादें ॥
॥ मन की उड़ान ॥
॥ मैं नदी हूँ ॥
॥ सफलता का महामंत्र ॥
॥ खुशियों का समाकलन ॥
॥ एकं सत् विप्रा बहुधा वदंती ॥
खण्ड-४ ॥ ग़ज़ल ॥
॥ मुझे क्या-क्या पसंद नहीं आता ॥
॥ धर्म और सत्ता ॥
॥ सिमटती दूनिया ॥
॥ वक्त ॥
॥ मेरे खुदा ॥
॥ संस्कृति ॥
॥ जिंदगी से मुस्कुराते हुए मिलो ॥
॥ दामिनी काण्ड ॥
॥ जन्मदाता ॥
॥ मूँछें मैं बढ़ाता हूँ ॥
॥ केदारनाथ बाढ़ ॥
॥ गुस्सा जो निकलना था सरकार पे ॥
॥ कुछ भी जरूरी तो नहीं ॥
॥ अवसाद का आलम ॥
॥ माँ प्रकृति ॥
॥ जरूरत ॥
॥ लोगों के ताने ॥
॥ आशिकी ॥
॥ आदमी की जड़ ॥
॥ शहर के फ्लैट ॥
॥ मज़हब और भगवान ॥
॥ आदत ॥
॥ दुआ ॥
॥ भूल जाता हूँ ॥
॥ टूटते सपने ॥
॥ दर्द ॥
॥ इश्क ॥
॥ कठपुतली ॥
॥ आखिरी चिंगारी ॥
॥ ख्वाब ॥
॥ माफीनामा ॥
॥ मोक्षा ॥
॥ हत्या ॥
॥ हँसी की खोज ॥
॥ वियोग ॥
॥ हक ॥
॥ रुहानी ॥
॥ अलग रास्तों का सफर ॥
॥ बिरह ॥
॥ विचार ॥
खण्ड-५ ॥ गीत ॥
॥ बिना पँखों की उड़ान ॥
॥ जब्दोजहद ॥
॥ हे! जी मैं पिया बिना ॥
॥ ॥
खण्ड-६ ॥ आख्यानक काव्य ॥
॥ हरिया की भूतबाधा ॥
॥ गंगाघाट की जलपरियाँ ॥
॥ नारीवाद ॥
॥ बाँसुरीवाला ॥
॥ बकरे कि माँ ॥
खण्ड-७ ॥ poem ॥
Morning
I like to walk in rain
॥
ख
ड़ी
बो
ली
॥
॥ दिल की गिरह खोल दो ॥
॥ ॥
21 मई 2024
दरस दो जगदम्बा, सुमिरन करूँ मैं तेरा।