॥ दिल की गिरह खोल दो ॥


॥ हे! जी मैं पिया बिना ॥

21 मई 2024



॥ हे! जी मैं पिया बिना ॥


हे! जी मैं पिया बिना

तन ज्यों हिया बिना

बाती ज्यों दिया बिना

जाऊं किधर जाऊँ कहाँ ॥


हे‍! जी मैं बिन साजन

रूप ज्यों बिन जोबन

मीरा ज्यों बिन मोहन

जाऊं किधर जाऊँ कहाँ ॥

हे! जी ...


दीपक बुझा सा लगे

आंगन जला सा लगे

विरहा की रात सताए

देवी की ज्योत जगाऊँ

मन्नत की डोर बंधाऊ

माँ बस ये पीर घटा दे


संसार फानी है

सांसें आनी जानी है

तेरी मेरी कहानी है

सुनाएँ मिलके, सुने जहाँ

हे! जी मैं ...


महकी बंसत की माटी

फूलों से सजी है पाटी

फागुन हम संग मनाएँ

ये रूप रंग ये लाली

चूड़ी, गजरा, बिंदिया, बाली

तोसे ही सब मुस्काए


सुनो जी तुम मेरे हो

प्रीत के फेरे हो

बाहों के घेरे हो

तुम आओ उधर, मैं चाहूँ जहाँ

हे! जी मैं ...


सखी रे नैहर रूठा

बाबुल का अंगना छूटा

मनवा भी पी संग चला रे

जीवन की आखिरी डोरी

अब तो ये बगिया तोरी

यही बस मोरी दुनिया रे


छोटा सा घर बनाएँ

नन्हें से दीप जलाएँ

जीवन यू संग बिताएँ

देखे हमें, जले जहाँ

हे! जी मैं ...