॥ वैदिक जीवन ॥


॥ चित्तविज्ञान ॥

पुरुषार्थ का आधुनिक औचित्य और उसकी उपलब्धि के सूत्र॥


आहारनिद्राभयमैथुनं च सामान्यमेतत्पशुभिर्नराणाम्
आहार, निद्रा, भय और मैथुन — ये चार बातें मनुष्य और पशु दोनों में समान हैं।

धर्मो हि तेषामधिको विशेषो धर्मेण हीनाः पशुभिः समानाः॥
मनुष्य का विशेष धर्म ही है, धर्म से हीन मनुष्य पशुओं के समान हो जाता है।

— हितोपदेश (१.२५)



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