॥ साए में धूप ॥


॥ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दुहरा हुआ होगा ॥

ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दुहरा हुआ होगा<ref>अपने मित्र के.पी शुंगलु को समर्पित जिन्होंने मतले क



॥ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दुहरा हुआ होगा ॥


ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दुहरा हुआ होगाअपने मित्र के.पी शुंगलु को समर्पित जिन्होंने मतले का विचार दिया

मैं सजदे में नहीं था आपको धोखा हुआ होगा

यहाँ तक आते-आते सूख जाती हैं कई नदियाँ

मुझे मालूम है पानी कहाँ ठहरा हुआ होगा

ग़ज़ब ये है कि अपनी मौत की आहट नहीं सुनते

वो सब के सब परीशाँ हैं वहाँ पर क्या हुआ होगा

तुम्हारे शहर में ये शोर सुन-सुन कर तो लगता है

कि इंसानों के जंगल में कोई हाँका हुआ होगा

कई फ़ाक़ेभोजन न मिलने पर भूखे रहने की स्थिति बिता कर मर गया जो उसके बारे में

वो सब कहते हैं अब, ऐसा नहीं,ऐसा हुआ होगा

यहाँ तो सिर्फ़ गूँगे और बहरे लोग बसते हैं

ख़ुदा जाने वहाँ पर किस तरह जलसाउत्सव हुआ होगा

चलो, अब यादगारों की अँधेरी कोठरी खोलें

कम-अज-कम एक वो चेहरा तो पहचाना हुआ होगा