॥ साए में धूप ॥


॥मत कहो, आकाश में कुहरा घना है ॥

मत कहो, आकाश में कुहरा घना है,यह किसी की व्यक्तिगत आलोचना है ।सूर्य हमने भी नहीं देखा सुबह से,



॥मत कहो, आकाश में कुहरा घना है ॥


मत कहो, आकाश में कुहरा घना है,

यह किसी की व्यक्तिगत आलोचना है ।

सूर्य हमने भी नहीं देखा सुबह से,

क्या करोगे, सूर्य का क्या देखना है ।

इस सड़क पर इस क़दर कीचड़ बिछी है,

हर किसी का पाँव घुटनों तक सना है ।

पक्ष औ' प्रतिपक्ष संसद में मुखर हैं,

बात इतनी है कि कोई पुल बना है

रक्त वर्षों से नसों में खौलता है,

आप कहते हैं क्षणिक उत्तेजना है ।

हो गई हर घाट पर पूरी व्यवस्था,

शौक से डूबे जिसे भी डूबना है ।

दोस्तों ! अब मंच पर सुविधा नहीं है,

आजकल नेपथ्य में संभावना है ।