॥ शास्त्रिय स्वरलिपि ॥
॥ केसर घोर के अंग लगाऊँ ॥
केसर घोर के अंग लगाऊँ अब तुम लाल कहाँ, जैहो भाज।

केसर घोर के अंग लगाऊँ अब तुम लाल कहाँ, जैहो भाज।
बहुत दिन कीनी अधेकाइ ताको फल सब पैहो आज॥
राग - यमन कल्याण
आरोह - सा रे ग, म॑ प, ध नि सां अथवा ऩि रे ग, म॑ प, ध नि सां ।
अवरोह - सां नि ध प, म॑ ग रे सा ।
पकड़ - ऩि रे ग रे, प रे, ऩि रे सा ।
ताल - धमार
| क | धि | ट | धि | ट | ध | - | ग | ति | ट | ति | ट | ता | - |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| x | २ | ० | ३ | ||||||||||
| नि प | ध | प | प | प | म'ध | प | म' | ग | - | रे ग | ग | गरे | प |
| के | ऽ | ऽ | स | र | घो | ऽ | र | के | ऽ | अं | ऽ | ग | ल |
| रे प | ग | - | रे | सा | ग सा | ग | सा | नि़ | - | नि़ रे | - | रेग | ग |
| गा | ऽ | ऽ | ऽ | ऊँ | अ | ब | तु | म | ऽ | ला | ऽ | ऽ | ल |
| प ग | म' | ग म' | ग प | म' | ध नि | नि | सां | नि | ध | प | म' | ग | म' |
| क | हाँ | ऽ | जै | ऽ | ऽ | ऽ | ऽ | हो | ऽ | भा | ऽ | ऽ | ज |
| क | धि | ट | धि | ट | ध | - | ग | ति | ट | ति | ट | ता | - |
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| x | २ | ० | ३ | ||||||||||
| रेग | ग | प | प | निध | सां | सां | सां | सां | |||||
| ब | हु | त | दि | नऽ | ऽ | की | ऽ | नी | |||||
| निसां | ध | नि | रें | सां | नि | ध | प | प | रे | ग | रे | सा | - |
| अ | धे | ऽ | ऽ | का | ऽ | ऽ | इ | ता | ऽ | ऽ | को | ऽ | ऽ |
| नि़रे | रे ग | - | ग म' | म' | ध नि | नि | सां | नि | ध | प | म' | ग | म' |
| फ | ल | ऽ | स | ब | पै | ऽ | ऽ | हो | ऽ | आ | ऽ | ऽ | ज |
