॥ शास्त्रिय स्वरलिपि ॥


॥ केसर घोर के अंग लगाऊँ ॥

केसर घोर के अंग लगाऊँ अब तुम लाल कहाँ, जैहो भाज।



॥ केसर घोर के अंग लगाऊँ ॥


केसर घोर के अंग लगाऊँ अब तुम लाल कहाँ, जैहो भाज।

बहुत दिन कीनी अधेकाइ ताको फल सब पैहो आज॥


राग - यमन कल्याण

आरोह - सा रे ग, म॑ प, ध नि सां अथवा ऩि रे ग, म॑ प, ध नि सां ।

अवरोह - सां नि ध प, म॑ ग रे सा ।

पकड़ - ऩि रे ग रे, प रे, ऩि रे सा ।

ताल - धमार


कधिटधिटध-गतिटतिटता-
x२०३
नि पधपपपम'धपम'ग-रे गगगरेप
केऽऽसरघोऽरकेऽअंऽगल
रे पग-रेसाग सागसानि़-नि़ रे-रेगग
गाऽऽऽऊँअबतुमऽलाऽऽल
प गम'ग म'ग पम'ध निनिसांनिधपम'गम'
कहाँऽजैऽऽऽऽहोऽभाऽऽज
कधिटधिटध-गतिटतिटता-
x२०३
रेगगपपनिधसांसांसांसां
बहुतदिनऽऽकीऽनी
निसांधनिरेंसांनिधपपरेगरेसा-
अधेऽऽकाऽऽइताऽऽकोऽऽ
नि़रेरे ग-ग म'म'ध निनिसांनिधपम'गम'
फलऽसबपैऽऽहोऽआऽऽज