॥ शास्त्रिय स्वरलिपि ॥


॥ केसर घोर के अंग लगाऊँ ॥

केसर घोर के अंग लगाऊँ अब तुम लाल कहाँ, जैहो भाज।



॥ केसर घोर के अंग लगाऊँ ॥


केसर घोर के अंग लगाऊँ अब तुम लाल कहाँ, जैहो भाज।

बहुत दिन कीनी अधेकाइ ताको फल सब पैहो आज॥


राग - यमन कल्याण

आरोह - सा रे ग, म॑ प, ध नि सां अथवा ऩि रे ग, म॑ प, ध नि सां ।

अवरोह - सां नि ध प, म॑ ग रे सा ।

पकड़ - ऩि रे ग रे, प रे, ऩि रे सा ।

ताल - धमार


धिधि-तितिता-
x
नि म'म'-रे रे
केघोकेअं
रे -रेसासासानि़-नि़ रे-रे
गाऊँतुला
म'म'म'निनिसांनिम'म'
हाँजैहोभा
धिधि-तितिता-
x
रेनिधसांसांसांसां
हुदिनऽकीनी
निसांनिरेंसांनिरेरेसा-
धेकाताको
नि़रेरे -म'म'निनिसांनिम'म'
पैहो